Sunday, September 9, 2012

जब अल्लाह रोमान्टिक हो उठे !

गुमसुम गुपचुप क्यों बैठी हो,इतना गुस्सा क्यो है आज !
मनकी बात बताना तो दूर, है क्या इसकी राज ?
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ऐसा लगता है घन घटा, चन्द देरमे बरसने बालि है !
कितना सुन्दर होगी वो क्षण, सामने नाचती मधु प्यालिहै !!
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बिजली चम्के, जोर हबासे धक्का दे वो हम और तुम पर !
गिरजायें दोनो साथ लिपटकर सांसो सांसमे चुमती अधर !!
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तु क्या देखे स्वर्गमे अल्ला ! आ धर्ति में नीचे जमकर !
दिल तेरा खो वैठ जाता है, यहिँ रहोगे तु भी मरकर !!
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गोद भरि ये परियोकी जवानी,सुन चाचाकी मेहर्बानी !
अल्लाह भूले  इससे आगे, क्या होगी इस धर्तीकी कहानी !!

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