Sunday, September 9, 2012

भूत-सबार, !

 ये दुनिया  है भूत-सबार,
आँख मुदके  अजमानेमे !
दिखता नही अपनी मौत,
पर नलिनी  सिकुड जानेमे !
भबरको मालुम क्या ,
जाने सिर्फ मधुरस पिनेकी !
थकती है वो पर जिती है,
उसका तो क्या बयां मर मिटजानेकी !!

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