Thursday, December 20, 2012

साबधान !

करली उसने मुझसे बादा
फसगया मै तो क्या थि अदा
मै भ्रवर केबल रसका प्यासी
बन  पडी वो तो गलेमे फासी
उस  अदामे थे जितने  फिदा
हो चुके  थे सब   अलबिदा
न मैने बोया न हि कुछ खोया
बदलेमे छाती कुट कर रोया
जगमे वस्तु मिले भी सुन्दर
तुम पहचानो उसकी अन्दर
जटाफल हाथमे, ठांनकर गोला
फेक्देता है बन्दर  भोला !

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