फसगया मै तो क्या थि अदा
मै भ्रवर केबल रसका प्यासी
बन पडी वो तो गलेमे फासी
उस अदामे थे जितने फिदा
हो चुके थे सब अलबिदा
न मैने बोया न हि कुछ खोया
बदलेमे छाती कुट कर रोया
जगमे वस्तु मिले भी सुन्दर
तुम पहचानो उसकी अन्दर
जटाफल हाथमे, ठांनकर गोला
फेक्देता है बन्दर भोला !
मै भ्रवर केबल रसका प्यासी
बन पडी वो तो गलेमे फासी
उस अदामे थे जितने फिदा
हो चुके थे सब अलबिदा
न मैने बोया न हि कुछ खोया
बदलेमे छाती कुट कर रोया
जगमे वस्तु मिले भी सुन्दर
तुम पहचानो उसकी अन्दर
जटाफल हाथमे, ठांनकर गोला
फेक्देता है बन्दर भोला !
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